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मांडर विधानसभा के सरवा पंचायत की मुखिया को निलंबित करने के मामले में, नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने राज्यपाल से मुलाकात की
Jharkhand:मांडर विधानसभा के सरवा पंचायत की मुखिया प्रभा किस्फोट्टा को निलंबित कर पदच्युत करने को लेकर नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी के नेतृत्व में मुखिया संघ का एक प्रतिनिधि मंडल झारखंड के राज्यपाल से मुलाकात की एवं सरवा पंचायत की मुखिया के निलंबन को लेकर न्यायोचित करवाई करने की मांग की।
मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने कहा कि सरकार पूरी तरह से आदिवासी विरोधी सरकार है। मुखिया के पद पर एक आदिवासी महिला है लेकिन यह दमनकारी सरकार सत्ता के नशे में चूर किसी भी असंवैधानिक कार्य करने से नही चूक रही।
उन्होंने कहा कि एक मुखिया जो यहां के स्थानीय विधायक की बात नही सुन रही उनके आगे पीछे नही घूम रही तो इसका बदला उन्हें निलंबित कर ले रहे। जब कि मुखिया खुद एक जनप्रतिनिधि है और उन पर किसी प्रकार के वित्तीय अनियमितता का आरोप नही है। साथ ही झारखंड में बिना कारण के किसी जनप्रतिनिधि को निलंबित करने का कोई भी प्रावधान नही है और ना ही यहां कोई नियमावली है।
नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि महामहिम राज्यपाल ने इस मामले को गंभीरता पूर्वक सुना और आश्वासन दिया कि राज्य सरकार और जिला अधिकारी में मामले की जानकारी लेंगे और इस मामले पर न्यायोचित करवाई करेंगे
वहीं प्रभा ने बताया बताया कि उन्हें साजिश के तहत बिना किसी कारण के झूठे आरोप लगाकर मांडर विधायक शिल्पी नेहा तिर्की एवं उनके पिता पूर्व विधायक बंधु तिर्की में सरकार में दबाव बनाकर निलंबित करवा दिया। जबकि उनके पंचायत में कई वर्षों से किसी प्रकार का कोई भी विकास कार्य नहीं किया जा रहा। ऐसे में जब इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई तो साजिश के तहत विधायक और पूर्व विधायक ने साजिश कर उन्हें निलंबित करवा दिया।
प्रभा ने बताया कि ग्राम पंचायत सरवा के अन्तर्गत ग्राम पंचपदा में सरना स्थल का कल्याण विभाग से सौंदर्यकरण का कार्य स्वीकृत हुआ था। जिसका शिलान्यास का कार्यक्रम दिनांक 04.09.2023 को निर्धारित था जिसमें मुख्य अतिथि सासंद सुदर्शन भगत को बुलाया गया था और उनके द्वारा विधिवत रूप से शिलान्यास का कार्यक्रम किया गया। इस बात से खफा हो कर स्थानीय विधायक शिल्पी नेहा तिर्की और उनके पिता बंधु तिर्की ने उन्हें गंदी गालियां दी और पद से हटाने की धमकी दी। दिनांक 04.07.24 को उपायुक्त कार्यालय स्पष्टीकरण हेतु चिट्ठी निकाला गया जिसमें प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित का 15 दिनो के अन्दर मुझे अपना पक्ष रखने का समय दिया गया लेकिन विधायक के दबाब में आकर उपायुक्त ने 5 दिनो के अंदर पुनः 09.07.24 को ही निलंबित कर दिया।